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बृज के गुप्त संतो और ठाकुर जी की लीलाओं को सभी के समक्ष लाना बाहर से आये भक्तों को ऊपरी आवरण के स्थान पर प्राचीन वृन्दावन के दर्शन कराना ही भगवतमय है । श्री मद्भागवत कोई ग्रन्थ नहीं अपितु यह स्वयं श्री युगल जोड़ी सरकार का साक्षात विग्रह है। श्री मद्भागवत श्रवण एवं आयोजित करने का सही अर्थ है उसे अपने निज जीवन में उतारना। यदि व्यक्ति के मन में पीठासीन व्यास जी एवं संतो के लिए श्रद्धा भाव है तो उस भगवत चरित्र को व्यक्ति अपने जीवन में आसानी से उतार सकता है । ठाकुर जी में लगन लगाने एवं अन्य जीवों पर कृपा करने का उद्देश्य भी श्री मद्भागवत द्वारा पूर्ण होता है। मेरा उद्देश्य प्राणी मात्र का श्री मद्भागवतम् के द्वारा उद्धार करना मात्र है ।



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