what are the Rattans which we got from Thakurji ?

                                                                                    *।।जय श्री यमुने।।शुभप्रभात्।।*


 


                                                                

                                                     *पृथिव्याम् त्रिणी रत्नानि जल मन्नम सुभाषितम्।*


                                                             *मुर्खे पाषाढ़ खण्डेषु रत्न संज्ञा विधीयते।।*




                                इस संसार में ठाकुर जी के द्वारा सिर्फ तीन ही रत्न बनाये गए है । 1- जल- जिससे जीवन का आरम्भ होता है। एवं जिसके बिना मनुष्य क्षण भर भी जीवित नहीं रह सकता जिसकी वजह से भगवान ने भी अपना प्रथम स्थान उसे ही बताया है। 2- अन्न- जिसके लिए मनुष्य कर्म करता है । अटल सत्य यही है जीव को जीवन के लिए भोजन अतिआवश्यक है।एक छोटे से छोटे जीव से लेकर बड़े से बड़े विशालकाय पशु तक को भोजन जरुरी है। 3- सुभाषितम्- जिससे जीवन को जीने ढंग पता चले । जिससे जीवन को सरल बनाने का तरीका प्राप्त हो । वही सुभाषितम् है। और इन सभी का सार श्री कृष्ण है। उन्ही की कृपा से इन तीनो रत्नों की प्राप्ति हमे सदा प्राप्त होती रहती है। लेकिन कुछ मुर्ख उन पत्थरों को ही रत्नों की संज्ञा देते रहते है और असल रत्न तो ठाकुर जी के चरण है । "पायो जी में तो राम रतन धन पायो" ।

 

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